शहरों में बारिश से झमाझम, देहात में फसलें बरबाद

 

पिछले 72 घंटों में तेज हवाओं के साथ हुई बरसात ने हरियाणा-पंजाब और देश के कई हिस्सों में किसानों की धान की फसल चौपट कर दी है, जिससे किसान समुदाय में मायूसी पसरी हुई है.

हरियाणा में सबसे अधिक नुकसान करनाल जिले में देखने को मिला है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, करनाल में पिछले तीन दिनों में लगभग 122 मिमी बारिश हुई है. मंगलवार की सुबह से शुरू हुई बारिश गुरुवार की शाम तक जारी रही. इससे कहीं-कहीं पक चुकी फसलों को नुकसान पहुंचा है. यमुना पट्टी से लगे गन्ने के खेतों में भी पानी भर जाने की खबर है. लगभग हर जगह धान की फसल में भी पानी खड़ा हो गया है. इन परिस्थितियों के बीच, किसानों को डर है कि खड़ी धान की फसल की कटाई में लगभग 10 दिनों की देरी हो सकती है.

आईसीएआर के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक डॉ वीरेंद्र लाठेर ने कहा कि बासमती की शुरुआती किस्मों और मोटे अनाज की किस्मों जैसे पीबी-1509, पीआर-126 और अन्य को बड़ा नुकसान हुआ है. उन्होंने मानसून की देरी से वापसी को किसानों को होने वाले संभावित नुकसान के पीछे एक प्रमुख कारण माना. उन्होंने कहा कि तेज बारिश के साथ तेज हवाएं चलने से फसलें चौपट हो गई हैं, जो पक चुकी थीं.

डॉ लाठर ने कहा कि पकी हुई फसल के दौरान बेमौसम बारिश से अनाज का रंग फीका पड़ सकता है क्योंकि जिले के विभिन्न हिस्सों में एक कवक रोग पहले ही आ चुका है और बारिश के बीच किसान फफूंदनाशकों का छिड़काव नहीं कर सकते.

धान में पहले से ही बौनी बीमारी की चुनौती का सामना कर रहे किसान बारिश से होने वाले इस अतिरिक्त नुकसान से चिंतित हैं.

निसिंग ब्लॉक के किसान मनदीप सिंह ने पत्रकारों को बताया, “पहले धान में बौनेपन की बिमारी फैल गई थी, जिसे स्टंटिंग के नाम से जाना जाता था. पहले बौनेपन ने उन्हें नुकसान पहुंचाया और अब, हवाओं के साथ बेमौसम बारिश उनकी फसल के लिए खतरा बन रही है.”

एक अन्य किसान अमन ने कहा, “धान की कटाई शुरू होने में सिर्फ 10-15 दिन बचे हैं, इस बेमौसम बारिश ने न केवल खड़ी फसल को नुकसान हुआ है, बल्कि मौसमी सब्जियों, विशेष रूप से आलू और सरसों की बुवाई में भी देरी हुई है.”

करनाल के उप निदेशक कृषि आदित्य डबास ने पत्रकारों को बताया, “अभी तक हमें नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है, लेकिन क्षेत्र के अधिकारियों को स्थिति का आकलन करने और एक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है ताकि आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सके.”

बेमौसम बारिश से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी नुकसान देखने को मिला है. मौसम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ का असर 27 सितंबर तक रहेगा. शामली कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक ने बताया कि शीतकालीन गन्ने की बुवाई का समय चल रहा है. सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण बुवाई पिछड़ रही है. बारिश से खड़ी गन्ने की फसल को कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन कटे हुए धान का दाना कमजोर और काला हो गया है.

कल 22 सितंबर को 8:30 से 5:30 के दौरान हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, पश्चिम मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, तेलंगाना और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कई हिस्सों में बादल बरसे या गरज के साथ बौछारें पड़ी.

कल 22 सितंबर को 8:30 से 5:30 के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कार-निकोबार में 10 सेमी, पश्चिम मध्य प्रदेश के गुना में 9 सेमी, पश्चिम उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में 6 सेमी, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली हर जगह 6 सेमी बारिश दर्ज की गई.