सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
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हरियाणा: सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए न शिक्षक, न किताबें!



स्कूल शिक्षा विभाग पहली से आठवीं के बच्चों को निशुल्क पुस्तकें देने के लिए दिसंबर में टेंडर कर देता है. लेकिन इस बार छह महीने बीत जाने के बाद भी टेंडर नहीं हुआ. जिसके चलते मई में विभाग ने बच्चों को किताबें देने से मना कर दिया.

अमर उजाला में छपी पत्रकार यशपाल शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग पहली से आठवीं के बच्चों को निशुल्क किताबें मुहैया कराने के लिए दिसंबर में टेंडर कर देता है. इस बार अधिकारियोंं की लापरवाही के कारण दिसंबर तो दूर मार्च-अप्रैल तक भी टेंडर नहीं हुआ. और मई में विभाग ने बच्चों को किताबें मुहैया कराने से हाथ खड़े कर दिए.

हरियाणा में सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत चिंताजनक है. हरियाणा के सरकारी स्कूलों में 20 हजार से अधिक शिक्षकों की कमी है. कक्षा पहली से लेकर आठवीं तक के बच्चों को इस सत्र के लिए किताबें ही नहीं मिल पाई हैं. 

खट्टर सरकार का स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक और किताबें मुहैया कराने का दावा झूठा साबित होता दिख रहा है.  इस सत्र में सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में 1.60 लाख की बढ़ोतरी हुई है. लेकिन सरकार की ओर से शिक्षकों की नई भर्ती करने की कोई प्रक्रिया नहीं शुरू की गई है.

नवंबर 2020 के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में 20 हजार से ज्यादा पद खाली हैं. स्कूलों में अप्रैल से सत्र शुरू हो चुका है. 500 प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की संख्या के अनुसार शिक्षकों की कमी है वहीं 70 से ज्यादा प्राथमिक स्कूल शिक्षक विहीन हैं.              

किताबों के टेंडर में छह महीने की देरी  

स्कूल शिक्षा विभाग पहली से आठवीं के बच्चों को फ्री पुस्तकें देने के लिए दिसंबर में टेंडर कर देता है. लेकिन  इस बार छह महीने बीत जाने के बाद भी टेंडर नहीं हुआ. जिसके चलते मई में विभाग ने बच्चों को किताबें देने से मना कर दिया. बच्चों को 200 से 300 रुपये किताबें खरीदने के लिए देने की घोषणा की गई लेकिन बहुत से बच्चों के खातों में यह राशि भी नहीं पहुंची. 

रिपोर्ट के अनुसार शिक्षाविद् सीएन भारती और कुछ बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद पहली से आठवीं कक्षा तक की सरकारी स्कूलों की किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं हैं. हरियाणा सरकार के शिक्षा विभाग की लापरवाही का खामियाजा सरकारी स्कूल के बच्चों और अभिभावकों भुगतना पड़ रहा है. कुछ बच्चों ने तो किताबें पुराने विद्यार्थियों से जुटा लीं, लेकिन अन्य को प्रकाशकों से संपर्क कर छपवानी पड़ रही हैं, जिनकी कीमत पांच सौ से सात सौ रुपये पड़ रही है.  

हरियाणा के स्कूलों में शिक्षकों की कमी

अमर उजाला में छपी रिपोर्ट के अनुसार नवंबर 2020 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में पक्के जेबीटी 6,217, मुख्य शिक्षक 842, टीजीटी 10,225, मौलिक मुख्याध्यापक 2,365, लेक्चरर 12,960, मुख्याध्यापक 676, प्रिंसिपल 991 कम हैं. यह कुल संख्या 34276 बनती है. कार्यरत 5000 गेस्ट जेबीटी, 6000 टीजीटी, 2000 गेस्ट पीजीटी व 800 तदर्थ शिक्षकों के पदों को भी भरा हुआ मान लिया जाए तब भी 20476 पद खाली रह जाते हैं. 

शिक्षा मंत्री कंवर पाल का पक्ष शिक्षा मंत्री कंवर पाल का कहना है कि शिक्षकों के पदों को भरने के लिए कर्मचारी चयन आयोग के जरिए भर्ती प्रक्रिया जारी है. जेबीटी लगभग पूरे हैं. अन्य श्रेणी के शिक्षकों की कमी जल्दी दूर हो जाएगी. पहली से आठवीं तक के बच्चों के लिए तीस फीसदी किताबें बाजार में उपलब्ध थीं. अन्य को पुराने छात्रों व प्रकाशकों से दिलाने का प्रयास जारी है.