सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
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आंदोलनरत खिलाड़ियों के आगे झुकी सरकार, ग्रुप सी की नौकरियों में खेल कोटा जारी रहेगा


Photo: Press Trust of India

बीते एक महीने से कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने हरियाणा के अनेकों जिलों में खेल आरक्षण नीति की बहाली के साथ-साथ उपरोक्त श्रेणियों के अनुसार खिलाड़ियों की सीधी भर्ती की मांग को लेकर कई प्रदर्शन किए थे.

हरियाणा सरकार ने गुरुवार को ग्रुप सी भर्ती में खिलाड़ियों के लिए 3 प्रतिशत आरक्षण की अपनी नीति को जारी रखने का फैसला लिया है. इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी लगातार सरकार के खिलाफ आंदोलनरत थे.

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार को आंदोलित खिलाड़ियों के आगे झुकते हुए कहा कि राज्य सरकार ने हरियाणा में ग्रुप सी की सरकारी नौकरियों में खिलाड़ियों के लिए 3% कोटा बहाल करने का फैसला किया है. खट्टर ने कहा कि ग्रुप डी की नौकरियों में खिलाड़ियों के लिए पहले से ही 10% आरक्षण दिया जाता है.

उन्होंने कहा कि ग्रेडेशन प्रमाणपत्रों में अनियमितता के संबंध में कई शिकायतें मिली हैं और ऐसी शिकायतों के निवारण के लिए राज्य सरकार द्वारा एक विशेष पोर्टल विकसित किया गया है.

सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि हर जिले में जिला खेल प्रबंधक के लिए एक ग्रुप ए पद सृजित किया जाएगा. खट्टर ने कहा कि उनकी ‘पदक लाओ, पद पाओ’ की नीति के तहत पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को ग्रुप ए, बी, सी और डी कैटेगरी की नौकरियां पहले की तरह जारी मिलती रहेंगी. खेल विभाग से संबद्ध खेल संगठनों द्वारा आयोजित खेल आयोजनों में भाग लेने वाले पदक विजेता खिलाड़ियों और खिलाड़ियों की जानकारी अपलोड की जाएगी और सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराई जाएगी. इस डेटा के सत्यापन के बाद, एक ग्रेडेशन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा.

सीएम खट्टर ने पिछले सप्ताह कहा था कि राज्य सरकार की खेल नीति के अनुसार केवल पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को ही सरकारी नौकरी मिलेगी और केवल खेल टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए बने ग्रेडेशन सर्टिफिकेट के आधार पर कोई नौकरी नहीं दी जाएगी.

बीते एक महीने से कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने हरियाणा के अनेकों जिलों में खेल आरक्षण नीति की बहाली के साथ-साथ उपरोक्त श्रेणियों के अनुसार खिलाड़ियों की सीधी भर्ती की मांग को लेकर कई प्रदर्शन किए थे. ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज विजेंदर सिंह ने इन आंदोलनों का नेतृत्व किया. विजेंदर सिंह ने हमें दिए गए एक इंटरव्यू में बताया, “हमें विरोध का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि हरियाणा सरकार ने युवा खिलाड़ियों के बड़ी श्रेणी वाली सरकारी नौकरियों में प्रवेश की गुंजाइश खत्म कर दी थी. हरियाणा में पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार द्वारा लागू सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए तीन प्रतिशत खेल कोटा समाप्त कर दिया गया था. यह तीन प्रतिशत खेल कोटा हरियाणा के खिलाड़ियों के लिए ओलंपिक और अन्य अंतराष्ट्रीय स्तर के खेलों में उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए प्रेरणा जैसा काम करता था. हरियाणा देश में खिलाड़ियों की नर्सरी के तौर पर जाना जाता है और खट्टर-चौटाला सरकार ने खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर लगा दिया था.”

इस मामले को लेकर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विधानसभा में खेलमंत्री संदीप सिंह पर तंज कसते हुए कहा था, “आपको जिस कोटा की मदद से नौकरी मिली थी. आपने वही खत्म कर दिया.”

बैकफुट पर आई सरकार ने फैसला लिया है कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले में श्रेणी-ए रिक्ति ‘जिला खेल प्रबंधक’ भी बनाएगी. सरकारी सर्कुलर में कहा गया है कि इन पदों पर केवल योग्य खिलाड़ियों की सीधी भर्ती की जाएगी. इसके साथ ही सरकार ग्रुप सी की नौकरियों में भर्ती करने से पहले खिलाड़ियों को उनकी रुचि के विभाग को चुनने का मौका भी देगी.