हरियाणा में 42 हजार मीट्रिक टन गेहूं सड़ा, बारिश में धान का भी यही हाल, 68 हजार क्विंटल स्टॉक गायब

 

देश के करीब 80 लाख गरीब लोगों के लिए सरकारी गोदामों में स्टोर किया गया गेहूं खराब हो गया है. हरियाणा के सरकारी गोदामों में लापरवाही के चलते पिछले दो साल में 42 हजार मीट्रिक टन गेहूं खराब हो चुका है. हरियाणा के सरकारी गोदाम खराब हो चुके गेहूं के बोरों से भरे पड़े हैं. खुले आसमान के नीचे रखे इन खराब गेहूं के बोरों को मीडिया की नजर से बचाने के लिए तिरपाल से ढक दिया गया है, लेकिन तिरपाल के अंदर रखे गेहूं के बोरों में पौधे तक उग आए हैं.

हरियाणा खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग का एक पत्र मीडिया में लीक हो चुका है, जिसमें खराब गेहूं को कौड़ियों के भाव बेच देने का जिक्र है. इस पत्र के अनुसार, कुरुक्षेत्र में 24624 मीट्रिक टन, कैथल में 11794 मीट्रिक टन, करनाल में 6587 मीट्रिक टन जबकि फतेहाबाद में 216 मीट्रिक टन ऐसा गेहूं है जो सड़ चुका है और उसे कौड़ियों के भाव नीलाम किया जा चुका है. एक एफसीआई के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “ये सड़ा हुआ अनाज बड़ी बड़ी कंपनियों को एथॉनोल बनाने के लिए कौड़ियों के भाव देने के लिए ऐसा किया गया है. जो थोड़ा सही हालत में है उसे देसी शराब फैक्ट्रियों को दे देंगे.”

जानकारी के अनुसार, चार जिलों का कुल 42 हजार मीट्रिक टन गेहूं इस साल खराब हो चुका है. इस गेहूं को 5 किलो के हिसाब से सरकार गरीबों को बांटती तो इससे 70 लाख से ज्यादा लोगों को गेहूं मिल सकता था. यह घटना बताती है कि देश में अनाज का सरप्लस उत्पादन होने के बावजूद हम भुखमरी के इंडेक्स में 100 नंबर के बाद क्यों हैं? 

यही हाल प्रदेश में इस सीजन में धान की खरीद का है. अभी हाल के दिनों हुई बारिश ने प्रदेश भर की अनाज मंडियों में धान को नुकसान पहुंचाया है, जिससे मंडियों द्वारा की गई खरीद व्यवस्था का पर्दाफाश हो गया है. किसानों ने अपनी उपज में नमी की मात्रा अधिक होने के कारण नुकसान होने की आशंका व्यक्त की है.

किसानों ने कहा कि बेमौसम बारिश ने अनाज मंडियों में पड़े धान के ढेरों को भीगो दिया है और यह फसल की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकता है.

अनाज ढकने के लिए बहुत कम प्लास्टिक शीट उपलब्ध
किसान अपनी उपज बेचने के लिए दो दिनों से मंडियों में डेरा डाले हुए हैं, लेकिन बारिश के कारण खरीद नहीं हो पा रही. धान पड़ा पड़ा मंडियों में भीग रहा है क्योंकि वहां बहुत कम प्लास्टिक की चादरें उपलब्ध हैं. आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न एजेंसियों ने 58,57,696 क्विंटल धान की खरीद की है, जिसमें से केवल 42,28,840 क्विंटल (72 प्रतिशत) ही उठाया गया है.

किसान धान को ढकने के लिए प्लास्टिक शीट की कमी की शिकायत कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें घर से प्लास्टिक शीट लाने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

करनाल के उपायुक्त अनीश यादव ने कहा कि सभी सचिवों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि आढ़तियों ने मंडियों में पड़े धान को तिरपाल से ठीक से ढक दिया है.

धान का स्टॉक 68000 क्विंटल कम पाया गया
करनाल की विभिन्न अनाज मंडियों में प्रॉक्सी खरीद के लिए फर्जी गेट पास जारी करने की खबरों के बीच मंगलवार को मुख्यमंत्री उड़न दस्ते की टीम ने जुंडला अनाज मंडी और विभिन्न चावल मिलों में छापेमारी की. दस्ते को करीब 68,000 क्विंटल धान स्टॉक में नहीं मिला है.