शनिवार, 04 फ़रवरी 2023
गांव-देहात

जींद के रोहड़ गांव की महिलाओं और लड़कियों ने सरकारी स्कूल के गेट पर जड़ा ताला



कोमल, वर्षा और अन्य छात्राओं नें टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि आस-पास के 10 किलोमीटर के दायरे में और कहीं भी स्कूल नहीं है. मजबूरी में इस स्कूल में आना पड़ता है. यहाँ भी अध्यापक नहीं हैं.

जींद के सफीदों शहर के पास रोहड़ गांव की महिलाओं और लड़कियों ने बुधवार को सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के गेट पर ताला लगा दिया. यहाँ तीन साल से शिक्षकों की कमी की वजह से बहुत सारी लड़कियों को स्कूल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा. स्कूल में 11 अध्यापकों के पद खाली पड़े हैं, लेकिन केवल एक महिला अध्यापक के सहारे ही स्कूल चल रहा है जो सिर्फ बायोलॉजी पढ़ाती हैं. इस स्कूल को 2019 में मिडिल स्कूल से सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अपग्रेड किया गया था. उस समय राम बिलास शर्मा हरियाणा के शिक्षा मंत्री थे. लेकिन अभी तक स्कूल में पूरा स्टाफ नहीं है. कोमल, वर्षा और अन्य छात्राओं नें टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि आस-पास के 10 किलोमीटर के दायरे में और कहीं भी स्कूल नहीं है. मजबूरी में इस स्कूल में आना पड़ता है. यहाँ भी अध्यापक नहीं हैं. अगर वह ऐसा नहीं करती हैं तो उनके माता-पिता उन्हें घर पर रहने के लिए कहेंगे.

इस स्कूल में ज्यादातर लड़कियां उन गरीब परिवारों से आती हैं, जो अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए बाहर नहीं भेज सकते. स्टाफ की कमी के बावजूद लड़कियां स्कूल आती हैं, क्लास में बैठती हैं और कुछ घंटों के बाद घर चली जाती हैं. स्कूल  का शौचालय भी टूटा हुआ है. पूर्व सरपंच प्रीतम सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया: “हमने मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव कृष्ण बेदी से लेकर निदेशक शिक्षा और जिला अधिकारियों तक हर किसी का दरवाजा खटखटाया, लेकिन कहीं भी हमारी बात नहीं सुनी गई. स्कूल में स्टाफ भेजने के लिए हम शिक्षा विभाग को जून तक का समय देते हैं. अगर सरकार स्टाफ नहीं भेजती है तो हम अपना विरोध तेज कर देंगे.”

सफीदों ब्लॉक के शिक्षा अधिकारी दलबीर मलिक ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि स्कूल के नौवीं से बारहवीं कक्षा के 158 छात्रों के लिए केवल एक अध्यापक है. हरियाणा सरकार ने 2019 में अध्यापकों का तबादला कर दिया और इस बीच, स्कूल को अपग्रेड भी कर दिया. इसके बाद, राज्य में किसी भी अध्यापक  का तबादला नहीं किया गया और जिले के अधिकारियों को अपने लेवल पर अध्यापकों की नियुक्ति करने का अधिकार नहीं है. मलिक ने कहा: “हमने उच्च अधिकारियों को स्थिति से अवगत करा दिया है जून तक इस मुद्दे को सुलझाने का वादा हमने ग्रामीणों से किया है.”

प्रदेश में ऐसे सैंकड़ों स्कूल हैं जो एक ही अध्यापक के भरोसे चल रहे हैं. इस से पहले भी अलग अलग जगहों पर छात्राएँ, अध्यापक और अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन कर चुकी हैं. 2 मार्च 2022 को नूह जिले के तावडू उपमंडल के गांव चाहल्का के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षकों की कमी से गुस्साए ग्रामीणों ने गुरुवार की सुबह गेट पर ताला जड़ा. 27 अप्रैल 2022 को दादरी जिले के गांव हिंडोल स्थित राजकीय उच्च विद्यालय में पिछले तीन वर्षों से गणित विषय का अध्यापक न होने से परेशान ग्रामीणों ने स्कूल के गेट पर ताला जड़ा.

पिछले साल जुलाई में कैथल के कलायत ब्लॉक के गांव दुमाड़ा में भी शिक्षकों की कमी को लेकर स्कूल पर ताला जड़ दिया था.

पिछले साल ही अगस्त में हरियाणा के कैथल जिले के गांव दुमाड़ा में राजकीय माध्यमिक स्कूल पर विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने ताला जड़ दिया था. क्योंकि स्कूल सिर्फ हेडमास्टर के भरोसे चल रहा था.