सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
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सिरसा में एसपी ऑफिस का घेराव करेंगे किसान, गिरफ्तार किसानों की रिहाई की मांग!



सिरसा के पांच किसानों की रिहाई के लिए किसान एसपी दफ्तर का घेराव करेंगे. सिरसा पुलिस ने दो किसानों पर राजद्रोह का केस भी दर्ज किया गया है. वहीं सिरसा प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए हरियाणा पुलिस की पांच, हरियाणा आर्म्ड पुलिस, आईआरबी और रैपिड एक्शन फोर्स की 4-4 टुकड़ियों की तैनाती की है.

किसान पिछले सात महीने से केंद्र सरकार द्वारा लाये गए तीन नये कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं. हरियाणा और पंजाब में किसान लगातार बीजेपी नेताओं के कार्यकर्मों का विरोध कर रहे हैं. इसी कड़ी में सिरसा के किसानों ने 11 जुलाई को बीजेपी सांसद सुनिता दुग्गल और डिप्टी स्पीकर के कार्यक्रम का विरोध करते हुए काफिले को घेरकर विरोध प्रदर्शन किया था. इस मामले में सिरसा पुलिस ने दो किसानों पर राजद्रोह के मामला दर्ज कर कुल पांच किसानों को गिरफ्तार किया है.

साथी किसानों की रिहाई की मांग को लेकर किसानों ने एसपी दफ्तर का घेराव का एलान किया है. संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने भी सिरसा एसपी दफ्तर के घेराव का समर्थन किया है. संयुक्त किसान मोर्चा के नेता भी सिरसा पहुंचकर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे.

अब तक मिली जानकारी के अनुसार किसान सिरसा के शहीद भगत सिंह स्टेडियम में इकट्ठा होकर किसान पंचायत करना चाहते हैं.शहीद भगत सिंह स्टेडियम में किसान पंचायत करने के बाद किसान एसपी ऑफिस के घेराव के लिए निकलेंगे. लेकिन पुलिस किसानों को भगत सिंह स्टेडियम में इकट्ठा होने से रोकना चाहती है. हालांकि किसान पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर शहीद भगतसिंह स्टेडियम की ओर बढ़ चुके हैं. 

शुक्रवार को प्रशासन के साथ किसान नेताओं की बैठक हुई थी, जो बेनतीजा रही. वहीं सिरसा प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए हरियाणा पुलिस की पांच, हरियाणा आर्म्ड पुलिस, आईआरबी और रैपिड एक्शन फोर्स की 4-4 टुकड़ियों की तैनाती की है.  

वहीं किसान नेताओं का कहना है कि जब तक उनसे सभी किसान साथियों को रिहा नहीं किया जाएगा तब तक किसान अपना धरना-प्रदर्शन जारी रखेंगे. इससे पहले हिसार में भी किसानों ने इसी तरह अपने साथी किसानों पर दर्ज मुकदमें वापस लेने के लिए आईजी दफ्तर का घेराव किया था जिसके बाद पुलिस प्रशासन नें माफी मांगते हुए किसानों पर दर्ज किए गए सभी केस वापस ले लिए थे.

बता दें कि तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों को सात महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है लेकिन सरकार की ओर से किसानों के साथ अब तक कोई ठोस बातचीत नहीं की गई है.