सोमवार, 03 अक्टूबर 2022
खेत-खलिहान

दूध की बढ़ती कीमतों के कारण 20 फीसदी परिवारों ने दूध खरीदना कम किया!



सर्वे में पाया गया कि 20 फीसदी उपभोक्ताओं ने दूध की मात्रा कम करने की बात स्वीकार की है जिसका मुख्य कारण लगातार दूध की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी को माना गया है.

दूध की बढ़ती कीमतों के कारण अब लोग घर में दूध की खप्त को ही कम कर रहे हैं. एक सर्वे में सामने आया है कि दूध की बढ़ती कीमतों के कारण तीन में से एक भारतीय परिवार या तो ब्रांड डाउनग्रेड कर रहा है या दूध की खपत कम कर रहा है. सर्वे के दौरान 20 फीसदी उपभोक्ताओं ने दूध की मात्रा कम करने की बात स्वीकार की है जिसका मुख्य कारण लगातार दूध की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी को माना गया है.

दूध की बढ़ती कीमतों की शिकायतों के बीच एक सामुदायिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा जानकारी इकट्ठा करने के लिए एक सर्वे किया गया है. सर्वे में परिवार कैसे बढ़ती दूध की कीमतों का सामना कर रहे हैं को ध्यान में रख कर सवाल किये गए थे. सर्वे में देश भर के 311 जिलों को शामिल किया गया जिसमें 21 हजार लोगों ने प्रतिक्रियाएं दीं जिसमें से 69 प्रतिशत पुरुष रहे इनमें से 41 प्रतिशत टियर 1 से थे, 34 प्रतिशत टियर 2 से और 25 प्रतिशत टियर 3, 4 और ग्रामीण जिलों से थे. 

बता दें कि अधिकतर परिवारों में, दूध और दूध से बने उत्पाद जैसे दही, मक्खन, घी, छाछ, आदि सबसे अधिक खपत वाले खाद्य पदार्थों में से हैं. वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका के कृषि विभाग (यूएसडीए) की “डेयरी एंड प्रोडक्ट्स की वार्षिक रिपोर्ट में भी सामने आया था कि भारत न केवल सबसे बड़ा दूध उत्पादक बल्कि दूध और दूध उत्पादों का सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है.  

पहले से ही उच्च स्तरीय महंगाई का सामना कर रहे उपभोक्ताओं को सहकारी समितियों द्वारा दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर झटका दिया दिया था. इसमें अमूल, मदर डायरी जैसी बड़ी कंपनियों ने दूध और अन्य उत्पादों की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी.

सर्वे में सामने आया कि कीमतों में बढ़ोतरी के बीच 68 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने समान मात्रा और ब्रांड के लिए अधिक भुगतान करने के लिए सहमति जताई है. वहीं 6 फीसदी लोगों ने कम कीमत वाले ब्रांड और दूध की स्थानीय आपूर्ति करने वाले पशुपालकों पर स्विच किया. 4 फीसदी लोगों ने उसी ब्रांड के सस्ते विकल्प पर स्विच किया जिसे वे पहले खरीद रहे थे. सबसे चौकानें वाली बात समाने आई कि 20 फीसदी उपभोक्ताओं ने “दूध की मात्रा कम करने” की बात स्वीकार की यानी जो उपभोक्ता पहले 1 लीटर दूध खरीदता था अब वो आधा लीटर दूध से काम चला रहे हैं.

सर्वे में यह भी समझने की कोशिश की गई कि लोग दूध कैसे खरीद रहे हैं. 10,522 में से 72 प्रतिशत ने बताया कि वो 500 मिलीलीटर या 1 लीटर के प्लास्टिक पाउच वाले पैक में दूध खरीद रहे हैं, 12 प्रतिशत उपभोक्ता खरीद स्थानीय फार्मों या बॉटलिंग इकाइयों से बोतलबंद दूध खरीद रहे हैं. जबकि 14 प्रतिशत उपभोक्ता स्थानीय विक्रेताओं से बिना पैकेट वाला दूध खरीद रहे हैं. वहीं केवल 2 फीसदी लोग शेल्फ लाइफ के साथ टेट्रा पैक दूध खरीद रहे थे.