शुक्रवार, 27 जनवरी 2023
गांव-देहात

बैंक अधिकारियों की मिलीभुगत से दुष्यंत चौटाला के जीजा ने कोड़ियों के भाव हड़पी किसान की जमीन



"यह जमीन देवेन्दर काद्यान ने अपने भाई दीपक काद्यान के नाम करवा रखी है, लेकिन सारी डील खुद करता है. देवेन्दर रिश्ते में उपमुख्यमंत्री के जीजा भी हैं."

करनाल के जलाला गाँव के किसान रसपाल सिंह (58) के घर उस समय मातम पसर गया, जब उन्हें पता चला कि इलाहाबाद बैंक ने उनकी सवा दो एकड़ जमीन नीलाम कर दिया. रसपाल की सवा दो एकड़ जमीन को साल 2016 में जजपा नेता देवेंदर काद्यान ने बैंक से सिर्फ 17 लाख रुपए में खरीद लिया, जबकि बैंक ने किसान को नीलामी की कोई जानकारी नहीं दी. उस समय इस जमीन की कीमत 56 लाख रुपए थी, लेकिन जजपा नेता काद्यान ने बैंक अधिकारियों की मिलीभुगत के चलते जमीन के वास्तिक मूल्य से 300 प्रतिशत कम दाम में खरीद लिया था.

किसान रसपाल के बेटे गगनदीप (36) ने हमें बताया, “मेरे पिताजी ने साल 2007 में अपनी सवा दो एकड़ जमीन पर इलाहाबाद बैंक से डेयरी के लिए 11 लाख रुपए का लोन लिया था. डेयरी पालन में 6 गायों की बीमारी की वजह से मौत हो गई. इन पशुओं का बीमा भी हमने करवाया था, जिसकी भरपाई बैंक ने आज तक नहीं की. मेरी मां को भी तब कैंसर हो गया, जिसकी वजह से हमारे हालात और भी बिगड़ गए.”

रसपाल ने लगभग तीन लाख रुपए लोन के भरे भी, लेकिन पशुओं की मौत से हुए नुकसान और घर के बिगड़े हालातों की वजह से सारा लोन नहीं चुका सके. ब्याज के कारण धीरे-धीरे इस लोन की राशि 17 लाख रुपए हो गई. बैंक ने बिना नोटिस और बिना कोई जानकारी दिए जमीन को नीलाम कर दिया, जिसे जजपा नेता कादयान ने 17 लाख रुपए में खरीद लिया.

रसपाल के बेटे गगनदीप ने गांव सवेरा को बताया, “बैंक ने हमें नीलामी की कोई जानकारी नहीं दी. हमें खुद तहसील में काम करने वाले हमारे एक जानकार से काफी दिनों बाद पता चला. साल 2017 में मामला सुलटाने के लिए हम चंडीगढ़ बैंक के बड़े अधिकारियों से भी मिले. अधिकारी ने हमें सारी कागजी कार्यवाई के साथ दस लाख रुपए में मामला खत्म करने की बात कही.”

किसान के पास जमीन बेचकर इस मामले को खत्म करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था. इसीलिए उसने तय किया कि वह एक एकड़ जमीन बेचकर लोन चुका देगा और कुछ पैसे अपनी पत्नी की बीमारी के लिए रख लेगा. लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया, क्योंकि सवा दो एकड़ जमीन का कानूनी मालिक अब जजपा नेता देवेन्द्र काद्यान बन गया था.

गगनदीप ने हमें बताया, “बीती 16 अप्रैल को देवेन्द्र काद्यान के परिवार के लोग और उनका वकील कोर्ट के आदेशों के हवाले से जमीन पर कब्जा लेने के लिए पुलिस फोर्स के साथ आए थे. लेकिन हमारे आसपास के किसान इकट्ठा हो गए और वे कब्जा नहीं ले पाए.

इस मामले में किसान का साथ दे रहे भारतीय किसान यूनियन (चौ छोटू राम) के किसान नेता जगदीप सिंह औलख ने हमें बताया, “जजपा नेता देवेंदर काद्यान ने अधिकारियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी से जमीन अपने नाम करवाई है. जमीन की बोली की सूचना किसान को नहीं दी गई और न ही जमीन बिकने पर किसान को सूचित किया गया. इतना ही नहीं, पटवारी और तहसीलदार को भी कोई जानकारी नहीं दी गई. न ही कोई मुनादी करवाई गई.”

जगदीप ने आरोप लगाया कि बैंक ने जमीन की बोली इस तरीके से लगवाई कि किसी को पता ही न चल पाए. बैंक ने नीलामी की खबर सिर्फ इंडियन एक्सप्रेस में निकलवाई जोकि अंग्रेजी अखबार है. आम किसान और ग्रामीण को न तो ई-नीलामी की जानकारी मिली और न ही अखबार में दिए गए विज्ञापन की. यह सब सिर्फ खानापूर्ति के लिए किया गया ताकि जमीन देवेंदर काद्यान खरीद सके.

बैंक के अधिकारियों के साथ मिलीभुगत कर आखिरकार किसान की जमीन देवेंदर ने खरीद ली. किसान को यह जानकारी न तो बैंक की तरफ से दी गई और न तहसील के किसी अन्य अधिकारी की तरफ से. जमीन खरीदने के बाद देवेंदर काद्यान ने कोर्ट में कब्जे के लिए केस कर दिया और कोर्ट आदेश आने के बाद 16 अप्रैल को पुलिस की मदद से कब्जा लेना चाहा.

काद्यान के इस कदम की वजह से इलाके के किसान गुस्सा हो गए और उन्होंने बीती 18 अप्रैल को करनाल डीसी कार्यालय पर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी किसानों ने देवेंदर काद्यान एवं बैंक कर्मियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता कि धारा 420 के तहत मुक़द्दमा दर्ज़ करने की मांग की. जगदीप ने बताया कि किसान के नीलामी से संबन्धित किसी भी कागज पर हस्ताक्षर नहीं हैं.

किसान नेता जगदीप औलख ने बताया, “यह जमीन देवेन्दर काद्यान ने अपने भाई दीपक काद्यान के नाम करवा रखी है, लेकिन सारी डील खुद करता है. देवेन्दर रिश्ते में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के जीजा भी हैं.”

इस मामले में करनाल उपायुक्त अनीश यादव ने सहायक जिला उपायुक्त सतीश कुमार के नेतृत्व में जांच कमेटी का गठन कर मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं.

किसान परिवार के साथ हुए इस अन्याय के खिलाफ प्रदेशभर में आवाज उठ रही हैं. 20 अप्रैल को भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के नेता राकेश टिकैत किसान से मिलने के लिए आए थे और 21 अप्रैल को भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) से गुरनाम सिंह चढ़ूनी भी आए थे. दोनों किसान नेताओं ने यह आश्वासन दिया है कि किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.