मंगलवार, 07 फ़रवरी 2023
गांव-देहात

पंजाब सरकार से नाराज मजदूरों ने मुख्यमंत्री आवास घेरा, हुआ लाठीचार्ज



मजदूरों की प्रमुख है कि उन्हें मनरेगा के तहत साल भर काम दिया जाए और न्यूनतम मजदूरी 700 रुपए निर्धारित की जाए।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान 30 नवंबर की दोपहर जब गुजरात में आम आदमी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार में व्यस्त थे और अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना रहे थे, तभी संगरूर में उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में किसान-मजदूरों ने सरकार पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाकर जोरदार प्रदर्शन किया। किसान व खेत मजदूरों के संगठनों के संयुक्त मोर्चा के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में पंजाब के सभी जिलों से आए करीब 10 हजार लोग शामिल हुए।

मोर्चा में शामिल जमीन प्राप्ति संघर्ष कमिटी (जेडपीएसएसी) के नेता मुकेश मलौध ने डाउन टू अर्थ को बताया कि प्रदर्शनकारी किसान मजदूर दोपहर ढाई सीएम आवास से करीब आधा किलोमीटर दूर पटियाला बाईपास पर एकड़ हुए। यहां से प्रदर्शनकारियों ने सीएम के ड्रीमलैंड कॉलोनी में स्थित सीएम आवास की तरफ कूच किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सीएम आवास के बाहर चार जिलों का पुलिस बल तैनात था और जबर्दस्त बैरिकेडिंग की गई थी।

सीएम आवास के बाहर पहुंचते ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प और धक्कामुक्की होने लगी। प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए पुलिस ने लाठियां भांजी और उन्हें पीछे धकेल किया। इस लाठीचार्ज और धक्कामुक्की में कई प्रदर्शनकारियों की पगड़ी गिर गई, महिलाओं की चुन्नियां खींच ली गईं और कई लोगों को चोटें आईं। इससे नाराज प्रदर्शनकारी सड़क पर ही बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

मुकेश ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को उग्र होता देखा प्रशासन ने आधा घंटे का समय मांगा। आधा घंटे बाद प्रशासन ने एक लेटर देते हुए कहा कि 21 दिसंबर को दोपहर 11 बजे मुख्यमंत्री से किसानों व मजदूरों की बैठक तय की गई है। मुकेश ने बताया कि मुख्यमंत्री से समय मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना प्रदर्शन खत्म कर दिया।

हालांकि मुकेश यह भी बताते हैं कि मुख्यमंत्री इससे पहले भी कई बार मीटिंग का समय दे चुके हैं लेकिन हर बार मीटिंग से भाग जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस बार मुख्यमंत्री ने ऐसा करने की कोशिश की तो सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ा जाएगा। मुकेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहते हैं, “सरकार ने बदलाव का जो मुखौटा पहना था, वह उतर गया है। पहले की और मौजूदा सरकार में कोई अंतर नहीं है।”

मजदूरों की प्रमुख है कि उन्हें मनरेगा के तहत साल भर काम दिया जाए और न्यूनतम मजदूरी 700 रुपए निर्धारित की जाए। साथ ही पंचायत भूमि (शामलात) का तीसरा हिस्सा दलित समुदाय को कम दर पर देना सुनिश्चित किया जाए। शामलात के लिए होने वाली डमी बोलियों को खारिज किया जाए और इस समस्या को स्थायी रूप से हल किया जाए।

भूमिहीन दलित मजदूरों की एक अहम मांग यह भी है कि जरूरतमंदों को 10-10 मरले का प्लॉट दिया जाए और घर बनाने के लिए 5 लाख रुपए का अनुदान दिया जाए, पहले से काटे गए भूखंडों पर तुरंत कब्जा दिया जाए, जिन गांवों की पंचायतों ने भूखंड के लिए प्रस्ताव पास किया है और अब तक उसे लागू नहीं किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

मजूदरों की ऐसी लगभग 30 मांगें हैं। मुकेश कहते हैं कि सरकार पहले ही बहुत सी मांगों को मान चुकी है, लेकिन उन्हें लागू करने की दिशा में अब तक कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। सरकार का यह रवैया अब नहीं चलेगा।

साभार: डाउन टू अर्थ