दिल्ली विश्वविद्यालय: हंसराज कॉलेज में पर्सन विद डिसेबिलिटी छात्रा को दूसरी मंजिल तक रेंगकर चढ़ना पड़ा!

 

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) की पहली वर्ष की छात्रा महिमा, जो पर्सन विद डिसेबिलिटी हैं और व्हीलचेयर का उपयोग करती हैं, उनको अपनी कक्षा में पहुंचने के लिए हंसराज कॉलेज की इमारत की दूसरी मंजिल तक सीढ़ियां रेंगकर चढ़नी पड़ीं.

यह घटना 15 फरवरी को हुई. महिमा ने बताया कि वहां कोई रैंप या लिफ्ट नहीं था. एक प्रोफेसर ने उन्हें ऊपर उठाकर ले जाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया और खुद रेंगकर ऊपर पहुंचीं.

महिमा ने कहा कि स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के छात्रों के साथ भेदभाव आम है, क्योंकि उन्हें नियमित डिग्री कोर्स के छात्रों जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं. उनकी कक्षाएं हाइब्रिड मोड में चलती हैं और उन्हें फिजिकल क्लास अटेंड करने के लिए केवल रविवार को ही कॉलेज जाना पड़ता है. पिछला सेमेस्टर किसी अन्य कॉलेज में हुआ था. अबकी बार एक अलग कॉलेज में क्लास लग रही हैं.

घटना के बाद इतिहास की असिस्टेंट प्रोफेसर माया जॉन ने वाइस-चांसलर योगेश सिंह को पत्र लिखकर पर्सन्स विद डिसेबिलिटी (PwD) छात्रों के लिए बेहतर सुविधाओं और एक्सेसिबिलिटी की मांग की है. पत्र में उन्होंने लिखा कि DU स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग द्वारा चयनित अध्ययन केंद्रों में उचित नियमन और जवाबदेही की कमी है, जिसके कारण पर्सन्स विद डिसेबिलिटी छात्रों के साथ-साथ अन्य छात्रों को भी असंवेदनशील और अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ता है.

वाइस-चांसलर से संपर्क करने पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग की प्रिंसिपल पायल मागो ने कहा कि यह मामला उनकी जानकारी में नहीं लाया गया था, वरना ग्राउंड फ्लोर पर आवश्यक व्यवस्था की जा सकती थी. उन्होंने दावा किया कि संस्थान पर्सन्स विद डिसेबिलिटी के लिए निर्धारित सभी प्रोटोकॉल का पालन करता है. एक अधिकारी के अनुसार, स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग में नामांकित लगभग चार लाख छात्रों में से 2,000 से अधिक पर्सन्स विद डिसेबिलिटी हैं.

इस घटना के विरोध में गुरुवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने पर्सन्स विद डिसेबिलिटी के लिए अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. छात्र संगठन क्रांतिकारी युवा संगठन ने कहा कि अध्ययन केंद्रों पर पर्सन्स विद डिसेबिलिटी छात्रों को अकेला छोड़ दिया जाता है. उनके सहायक स्टाफ, सहायता और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी रहती है. इससे उनकी सामाजिक और शैक्षणिक भागीदारी में अड़चनें आती हैं.

DU की एकेडमिक काउंसिल सदस्य डॉ. माया जॉन ने बताया कि वे इस घटना से बेहद व्यथित हैं. उन्होंने कहा कि एक प्रतिष्ठित नॉर्थ कैंपस कॉलेज में पर्सन विद डिसेबिलिटी महिला छात्रा को दूसरी मंजिल तक खुद को घसीटना पड़ा और एक गंदे शौचालय का उपयोग करना पड़ा. उन्होंने वाइस-चांसलर को भेजे अपने प्रतिनिधित्व में सभी अध्ययन केंद्रों के लिए तत्काल एक्सेसिबिलिटी ऑडिट कराने और अनिवार्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने वाली एसओपी जारी करने की मांग की है.

दिल्ली विश्वविद्यालय में पर्सन्स विद डिसेबिलिटी छात्रों के साथ भेदभाव और सुविधाओं की कमी की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं. पिछले कई वर्षों में छात्रों ने हॉस्टल, परिवहन, फीस में छूट, रैंप, लिफ्ट और शौचालयों की दुर्गमता जैसी समस्याओं को लेकर शिकायतें दर्ज की हैं. कई कॉलेजों में लिफ्ट अक्सर खराब रहती हैं, सहायक उपकरण उपलब्ध नहीं होते और दैनिक आधार पर असंवेदनशील व्यवहार की शिकायतें आम हैं.

2010 के दशक में दिल्ली हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय को पर्सन्स विद डिसेबिलिटी एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर फटकार लगाई और जुर्माना भी लगाया था. परीक्षा केंद्रों में राइटर की व्यवस्था में अनियमितताएं, अयोग्य राइटरों की नियुक्ति, उपस्थिति नियमों की सख्ती और एक्सेसिबिलिटी की कमी जैसी समस्याएं बार-बार उजागर हुई हैं. ये मामले स्पष्ट करते हैं कि विश्वविद्यालय में पर्सन्स विद डिसेबिलिटी छात्रों के लिए बुनियादी ढांचे, संवेदनशीलता और समावेशी नीतियों की व्यवस्थित कमी बनी हुई है, जो उनकी शिक्षा, गरिमा और समान अवसरों को प्रभावित करती रहती है.