मुजफ्फरनगर किसान महापंचायत में भारी संख्या में जुटे किसान, SKM ने किया 27 सितंबर को भारत बंद का एलान!

तीन नये कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर किसान पिछले नौ महीने से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे हैं. तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों ने बीजेपी की केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के जीआईसी ग्राउंड में आयोजित किसान महापंचायत में लाखों की सख्यां में किसान जुटे. हरियाणा-पंजाब से भी किसान, महापंचायत में शामिल होने के लिए एक दिन पहले जुटना शुरू हो गए थे. 

आज दिनभर किसान महापंचायत स्थल के आस पास दस-दस किलोमीटर तक जाम की स्थिति बनी रही. महापंचायत के खत्म होने तक भी किसानों के आने का सिलसिला जारी रहा. किसान महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉ दर्शनपाल सिंह, बलबीर सिहं राज्यवाल , योगेंद्र यादव और अन्य किसान नेता शामिल हुए. वहीं किसान नेता राकेश टिकैट, गुरनाम सिंह चढूनी, सुरेश कौथ आदि नेता भी महापंचायत में शामिल हुए.

मुजफ्फरनगर की किसान महापंचायत में किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, “एफसीआई के गोदाम भी अब सरकार के हाथ में नहीं रहे हैं. सरकार ने एफसीआई तक के गोदामों को भी अदानी के हवाले कर दिया है. वहीं किसान नेता राकेश टिकैत ने मीडिया की आजादी पर बोलते हुए कहा, “देश में कैमरे और कलम पर बंदूक का पहरा है. देश का मीडिया सरकार के दबाव में काम कर रहा है.” आगे उन्होंने गन्ने के भाव को लेकर कहा, “सरकार में आने से पहले इन लोगों ने 450 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का दाम देने का वादा किया था, यह वादा आज तक पूरा नहीं हुआ. हम इन सभी मुद्दों को लेकर देश के लोगों के बीच जाएंगे. आगे उन्होने कहा, “उत्तर प्रदेश की जनता दंगा करवाकर सत्ता हथियाने वाले लोगों को स्वीकार नहीं करेगी.”      

वहीं हरियाणा से आए किसान नेता सुरेश कौथ ने किसान महापंचायत के मंच से कहा, “2013 से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी का कोई नाम लेने वाला तक नहीं था. 2013 के बाद इन लोगों ने मुजफ्फरनगर में दंगे करवाकर सत्ता हथियाने का काम किया है. हम लोग यहां सभी धर्मों की एकता का पैमाग लेकर आए हैं. बीजेपी का राष्ट्रवाद सावरकर का राष्ट्रवाद है. सावरकर के राष्ट्रवाद में किसानों, मजदूरों और आदिवासियों के लिए कोई जगह नहीं है. हमारा राष्ट्रवाद शहीद भगत सिंह जी का राष्ट्रवाद है.”

पंजाब से आने वाले संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेता डॉ दर्शन पाल ने कहा, “आज से करीबन 165 साल पहले मुजफ्फरनगर के पास मेरठ से 1857 की बगावत शुरू हुई थी. यूपी के लोगों को इस बात के लिए बधाई कि 1857 की क्रांति की झलक आज मुजफ्फरनगर शहर में भी दिखाई दी है. आज हम सभी यहां से मोदी-शाह-कॉर्पोरेट की सरकार को हटाने का संकल्प लेते हैं.”

पंजाब के बड़े किसान नेता बलबीर सिंह राज्यवाल ने कहा, “मुजफ्फरनगर के लोगों ने बाहर से आने वाले हरियाणा और पंजाब के किसानों को बहुत प्यार दिया. आज सारा देश एक बड़े संकट में है, जो आदमी सख्त मेहनत करता है वो भूखा मर रहा है. सरकार एक-एक करके देश के सभी सेक्टर बेचा रही है. सारी दुनिया का विफल मॉडल हमारे देश के किसानों पर थोपने की कोशिश हो रही है.”

खेती-किसानी कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार अजीत सिहं ने गांव-सवेरा से बातचीत में कहा, किसान महापंचायत का महत्व बताते हुए कहा कि आज तक किसानों का आज तक इतना बड़ा जमावड़ा कभी नहीं देखा. मुजफ्फरनगर की किसान महापंचायत किसान आंदोलन के लिए मील का पत्थर साबित होगी. उन्होंने कहा कि आज का संघर्ष पहले के किसान संघर्षों से बहुत बड़ा है. दमनकारी सरकार और मीडिया के हमलों के बीच खड़ा किसान आंदोलन किसानों और किसान राजनीति को एक नई दिशा देगा.”     

किसान महापंचायत को सफल बनाने के लिए मुजफ्फरनगर और आस-पास के गांवों के किसान कईं दिन पहले से तैयारियों में जुटे थे. हरियाणा-पंजाब से आए किसानों के खाने-पीने और एक रात रहने की व्यव्स्था का जिम्मा किसानों ने खुद संभाला हुआ था.

वहीं मंच से जानकारी दी गई कि 9 और 10 सिंतबर को लखनऊ में किसान नेताओं की मीटिंग होगी जिसमें मिशन यूपी के तहत उत्तर प्रदेश के हर जिले में एसकेएम-यूपी बनाने की रणनीति बनाई जाएगी. 15 सितंबर को जयपुर में किसान पंचायत होगी. तो वहीं 7 सितंबर को करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में करनाल सचिवालय का घेराव किया जाएगा.