हरियाणा में इंदौर जैसे हालात, सात हजार से ज्यादा पानी के सैंपल फेल!

हरियाणा में लोगों की सेहत पर खतरा मंडरा रहा है. राज्य में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. हालिया जांच में साढ़े सात हजार से अधिक पानी के सैंपल मानकों पर फेल पाए गए हैं. इनमें कई जगहों पर भूजल खराब है, 17 जिलों में फ्लोराइड की समस्या सामने आई है, जबकि 9 जिलों में यूरेनियम की मात्रा तय सीमा से ज्यादा मिली है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार दूषित पानी के लगातार सेवन से हड्डियों, किडनी और पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है. ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी यह समस्या तेजी से फैल रही है.

जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कई शहरों और कॉलोनियों में 60 से 70 साल पुरानी जर्जर पाइप लाइनों से घरों तक पानी पहुंच रहा है. सीवर लाइनों के साथ गुजर रही इन पाइप लाइनों में लीकेज के कारण गंदा पानी पेयजल में मिल रहा है. इससे साफ पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है.

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले चार वर्षों में करीब 1.27 लाख पानी के नमूनों की जांच की गई, जिनमें से हजारों नमूने असुरक्षित पाए गए. कुछ जिलों में तो एक साल के भीतर लिए गए सैंपल्स में बड़ी संख्या में फेल होने के मामले सामने आए हैं. रिपोर्ट के अनुसार कई जिलों में भूजल में नाइट्रेट, फ्लोराइड, यूरेनियम और आर्सेनिक जैसे खतरनाक तत्व तय मानक से कहीं अधिक पाए गए हैं. कुछ स्थानों पर फ्लोराइड की मात्रा 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा दर्ज की गई, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से नहरों और जलस्रोतों के पास सीवेज और औद्योगिक कचरा न छोड़ने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका सख्ती से पालन नहीं हो रहा. कई जगहों पर बिना ट्रीटमेंट के गंदा पानी जलस्रोतों में छोड़ा जा रहा है, जिससे पेयजल स्रोत लगातार दूषित हो रहे हैं.

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